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“स्वास्थ्य केंद्र या अवैध वसूली का अड्डा? अमरोली सोमाली CHC की बदहाली पर सवाल”

"बिना नियुक्ति के 'सफेदपोश' दाइयों का तांडव, क्या स्वास्थ्य विभाग है सो रहा?" "अमरोली सोमाली CHC: गरीब मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा रही अवैध 'वसूली गैंग'"

अजीत मिश्रा (खोजी)

स्वास्थ्य केंद्र या वसूली का अड्डा? अमरोली सोमाली CHC की बदहाली पर प्रशासनिक मौन क्यों?

उत्तर प्रदेश।।

बस्ती।। सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर आम जनमानस का भरोसा होता है कि वहां उन्हें मुफ्त और सम्मानजनक इलाज मिलेगा। लेकिन, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) अमरोली सोमाली की वर्तमान स्थिति ने इन दावों की पोल खोलकर रख दी है। यहां सरकारी व्यवस्था की आड़ में एक ऐसा ‘वसूली गैंग’ सक्रिय है, जो न केवल गरीब मरीजों की जेब ढीली कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रहा है।

😇क्या ‘बिना नियुक्ति’ के सक्रिय हैं लोग?

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि केंद्र पर कुछ महिलाएं बतौर दाई, स्टाफ नर्स और चिकित्सक बनकर काम कर रही हैं, जबकि उनका नाम किसी भी आधिकारिक ड्यूटी रजिस्टर या विभागीय रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं है। सवाल यह है कि आखिर बिना किसी वैध सरकारी नियुक्ति के ये बाहरी लोग स्वास्थ्य केंद्र के अंदर मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने का साहस कैसे कर रहे हैं? क्या यह संभव है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के बिना परिसर में ऐसा कोई समानांतर तंत्र चलता रहे?

😇गरीब मरीजों की मजबूरी, वसूली गैंग की कमाई

मरीजों का आरोप है कि प्रसव जैसी संवेदनशील सेवाओं के समय उनसे अवैध वसूली की जाती है। इतना ही नहीं, जो गरीब इन अवैध मांगों का विरोध करते हैं, उनके साथ अभद्र और अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया जाता है। यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि एक मानवीय अपराध है। स्वास्थ्य विभाग का यह ‘दुष्कृत्य’ उस गरीब ग्रामीण परिवार के विश्वास को तोड़ रहा है, जिसके पास सरकारी केंद्र के अलावा और कोई विकल्प नहीं होता।

😇वर्दी के नाम पर लूट का तांडव

हैरानी की बात यह है कि बिना किसी नियुक्ति पत्र और ड्यूटी रजिस्टर में नाम दर्ज हुए, बाहरी महिलाएं खुद को ‘स्टाफ’ बताकर मरीजों का शोषण कर रही हैं। प्रसव के नाम पर अवैध वसूली करना और विरोध करने पर मरीजों को अपमानित करना, क्या यही स्वास्थ्य विभाग की ‘संवेदनशीलता’ है? गरीब ग्रामीण जनता, जो अपनी उम्मीदें लेकर यहां आती है, वह अब इस ‘वसूली गैंग’ के चंगुल में फंसकर लुटने को मजबूर है।

😇मिलीभगत का नंगा सच

सवाल सीधा और कड़ा है—बिना विभागीय अधिकारियों की शह के, स्वास्थ्य केंद्र के भीतर बाहरी लोग इतनी हिम्मत कैसे कर सकते हैं? कौन हैं वो अधिकारी, जिनकी मेहरबानी से ये लोग वर्दी के नाम पर मरीजों का खून चूस रहे हैं? या फिर ये अवैध दाइयां और कथित स्टाफ उन्हीं अधिकारियों के ‘अघोषित वेतनभोगी’ हैं?

💫चेतावनी: अब ‘जांच’ का दिखावा नहीं चलेगा

अक्सर ऐसी खबरों के बाद ‘जांच समिति’ का नाम लेकर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। लेकिन इस बार जनता और हम मांग करते हैं:

👉तत्काल गिरफ्तारी: उन सभी बाहरी लोगों पर FIR दर्ज हो जो बिना किसी पद के स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों को लूट रहे हैं।

👉अधिकारियों पर कार्रवाई: CHC प्रभारी और संबंधित अधिकारियों को तुरंत निलंबित किया जाए। उनकी जवाबदेही तय हो कि ये ‘बाहरी लोग’ वहां क्या कर रहे थे?

👉पारदर्शिता का नामोनिशान: जब तक मरीजों को यह नहीं पता होगा कि वहां तैनात असल स्टाफ कौन है, तब तक यह लूट नहीं रुकेगी।

प्रशासन कान खोलकर सुन ले: यदि जल्द ही इस वसूली गैंग पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह आंदोलन का रूप लेगा। स्वास्थ्य सेवा दान है, व्यापार नहीं। इसे ‘वसूली का अड्डा’ बनने से रोकना होगा, वरना जनता इस भ्रष्ट व्यवस्था को उखाड़ने में देर नहीं करेगी।

💫जवाबदेही किसकी?

CHC अमरोली सोमाली की यह स्थिति प्रशासनिक लापरवाही और संवेदनहीनता का जीता-जागता उदाहरण है। आखिर कब तक बाहरी लोगों को स्वास्थ्य केंद्र में अपनी मनमानी करने की छूट दी जाएगी?

😇अब मांग केवल जांच की नहीं, बल्कि कार्रवाई की है:

👉उच्च स्तरीय जांच: मामले की निष्पक्ष जांच हो और उन अधिकारियों को चिन्हित किया जाए जिनकी छत्रछाया में यह गोरखधंधा फल-फूल रहा है।

👉सख्त कार्रवाई: बिना नियुक्ति के काम कर रहे लोगों को तुरंत परिसर से हटाया जाए और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय और कानूनी कार्यवाही की जाए।

👉पारदर्शिता सुनिश्चित हो: मरीजों के लिए ड्यूटी पर तैनात स्टाफ की सूची सार्वजनिक की जाए ताकि उन्हें पता हो कि वे किससे बात कर रहे हैं।

स्वास्थ्य सेवाएं किसी की कमाई का जरिया नहीं, बल्कि एक नागरिक का अधिकार हैं। यदि प्रशासन ने अभी भी अपनी आंखें नहीं खोलीं, तो यह व्यवस्था पूरी तरह से ढह जाएगी।

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